The research and writing of this paper has been done jointly by Kanchi Kohli and Shalini Bhutani. Kanchi is member Kalpavriksh Environmental Action Group and Shalini is an independent lawyer and biodiversity researcher. Together with other groups in India they coordinate the Campaign for Conservation and Community Control over Biodiversity.
This briefing paper has been prepared for the NGO Alliance on CBD (India) and has been supported through WWF-India’s CSO initiative.

For copies please write to This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. and This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it.. A contributory amount of Rs.100 or US$ 5 (postage additional) for this paper in order to support the research and campaign activities is requested. A hindi translation is currently underway.

Available in हिंदी - Contents

नया प्रकाशन 

लाभ की मृग्या

भारतीय जैवविवधता प्रणाली के संदर्भ में अनुवांशिक संसाधनों और पारंपरिक ज्ञान तक पहुंच से जुड़े मुद्दे

नागोया प्रोटोकौल के बाद संसाधनों तक पहुंच तथा लाभ सहभाजन के विषय पर एक दृष्टिकोण

लेंखक कांची कोहली एवं शालिनी भुटानी

 इस लेख के लिये शोध एवं लेंखन कांची कोहली और शालिनी भुटानी द्वारा संयुक्त रुप से तैयार किया गया है। कांची कल्पवृक्ष संस्था की सदस्या है एवं शालिनी स्वतंत्र वकील और जैवविवधता शोधकर्ता के रुप में काम करती है। दोनो लेंखक अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर भारत में जैवविवधता के संरक्षण एवं समुदायिक नियंत्रण अभियान को संचालित करती है।

इस लेख की प्रतियों के लिये कृपया This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. (देहली) या This email address is being protected from spambots. You need JavaScript enabled to view it. (पूना) को लिखें। जैवविवधता से जुडें अभियान एवं शोध की सहायता के लिये इस लेख की प्रति के लिये सहयोग राशि के रुप में १०० रुपये आमंत्रित है।