Various articles covering different aspects of the environment and conservation : Read here

 

'What Has Globalisation Meant for India? Economic globalisation since 1991 has caused enormous environmental damage, and made the situation of India's poorest people worse. This brochure shows how. (Also available in hard copy from Kalpavriksh at Rs. 40). Globalization Brochure (Hindi)

भारत में वैश्वीकरण: प्रभाव और विकल्प

पिछले दो दशकों के दौरान हमारे देश ने जबर्दस्त आर्थिक तरक्की की है। लेकिन इस कामयाबी का एक अंधकारमय पैलू भी है जो हमारी नजरों से ओझल या अनजान छूट गया है। मुल्क की आधी से ज्यादा आबादी या तो तरक्की की इस दौड़ में पिछे छूट गई है या इस तरक्की की कीमत चुका रही है। पर्यावरण को जो स्थायी नुकसान पहुंचा है सो अलग। वैश्विक विकास का मौजुदा ताना-बाना न तो पर्यावरणीय स्तर पर टिकाऊ है और न ही सामाजिक समानता के लिए अनुकूल है। ये हिंदुस्तान को और ज्यादा तीखे टकरावों व कष्टों की ओर धकेल रहा है। लेकिन दूसरी ओर हमारे सामने कई ऐसे वैकल्पिक तौर-तरीके और रास्ते भी हैं जिन पर चलते हुए हम धरती की सेहत को नुकसान पहुंचाए बिना एक ज्यादा समतापरक व खुशहाल भविष्य की तरफ बढ़ सकते है। यह रास्ता एक मूलभूत पर्यावरणीय लोकतंत्र का हिस्सा है।

प्रस्तुत प्रकशन में सबसे पहले हमने भारत में वैश्वीकरण के आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आयामों के बारे में कुछ तथ्य दिए हैं। इसके बाद हमने उसके पर्यावरणीय प्रभावों का एक विस्त्रुत लेखा-जोखा तथा एक बेहतर भविष्य की ओर जाने वाले वैकल्पिक रास्ते सुझाए हैं।

Announcement Brochure (Hindi & English)

Ramchandra Guha on Kalpavriksh's Narmada Trek in the Telegraph (August 2013) and the Hindustan Times (August 2013)

Narmada trek 1983, crossing ricefield 1 In 1983, Kalpavriksh and the Hindu College Nature College undertook a 50-day yatra on foot, boat, and bus from the mouth to the origin of the Narmada river. Their aim was to absorb the ecology, culture, and life of the river, and understand the potential impacts of the massive river valley projects being proposed in its basin. For the Invitation and agenda..

पाण्याचे राजकारण: धरणे,

प्रिय मित्रहो,

पाण्याचे राजकारण: धरणे, दुष्काळ आणि विकेन्द्रीकरण या विषयावर दिनांक २० जुलै २०१३ रोजी एक कार्यशाळा आयोजीत केली आहे, त्यात आपण अवश्य सहभागी व्हावे. कार्यशाळेचे ठिकाण - लोकायत, तिसरा मजला, सिंडिकेट बँकेच्या समोर, लॉ कॉलेज रोड, पुणे - ४

या कार्यक्रमाचे निमित्त आहे १९८३ साली नर्मदेच्या काठाने काही तरुणांनी केलेल्या पदयात्रेचा तिसावा वर्धापन दिन. नर्मदा खो-यातील जनजीवन समजून घेण्याचा, व अनेक लहान-मोठ्या धरणांचा समावेश असलेल्या नियोजित "नर्मदा खोरे विकास प्रकल्पाच्या" संभाव्य परिणामांचा अभ्यास करण्याच्या उद्देश्याने दिल्लीतील कल्पवुक्ष संस्था व हिंदू कॉलेज नेचर क्लब यांनी मिळून त्या यात्रेचे आयोजन केले होते. त्या अनुभवाने यात्रेत सहभागी झालेल्यांपैकी ब-याच जणांच्या जीवनात अमुलाग्र बदल घडून आले. तसेच, १९८४ साली प्रकशित केलेल्या "नर्मदा व्हॅली प्रोजेक्ट: डेव्हलपमेंट ऑर डिस्ट्रक्शन" या रिपोर्ट द्वारा धरणविरोधी चळवळीला अल्पशा प्रमाणात मदत मिळाली.

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